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इतिहास

अहमदाबाद का इतिहास अणहिलवाड़ (आधुनिक पाटन) के शासक सोलंकी राजा कर्णदेव प्रथम के साथ ग्यारहवीं शताब्दी में शुरू हुआ। इन्होंने भील राजा अशपल्ल या आशापाल के खिलाफ युद्ध छेड़ा और उनकी जीत के बाद साबरमती के किनारे पर आधुनिक अहमदाबाद की जगह पर एक कर्णावती नामक शहर की स्थापना की।
सोलंकी शासन तेरहवीं शताब्दी तक चला, जब द्वारका  के वाघेला राजवंश के नियंत्रण के अधीन गुजरात आया। दिल्ली सल्तनत ने तेरहवीं सदी के अंत में गुजरात जीत लिया।
पंद्रहवीं सदी की शुरुआत में मुस्लिम मुज़फ्फरिद राजवंश द्वारा एक स्वतंत्र सल्तनत का शासन गुजरात में स्थापित था और 1411 में सुल्तान अहमद शाह ने कर्णावती को अहमदाबाद नाम से बदलकर इसे अपनी राजधानी के रूप में स्थापित किया। अहमदाबाद 162 साल (1411 - 1573) के लिए इस सल्तनत की राजधानी था।
भारत के तेजी से विकासशील अग्रीम शहरों में से एक अहमदाबाद भी बड़ी सड़कों और उल्लेखनीय वास्तुकला के साथ आगे है। यह शहर मूलत: साबरमती नदी के किनारे पर बनाया गया था, लेकिन बाद से उसका विस्तार किया गया है।
1487 में अहमद शाह के पौत्र महमूद बेगड़ा ने छह मील की परिधि में शहर को किलेबंद करके 12 दरवाज़े, 189 गढ़ और 6,000 से अधिक पलटनें बाहर के आक्रमणकारियों से बचाने के लिए तैनात की थी।
अंतिम सुलतान मुज़फ्फ़र तृतीय के समय शहर में स्थितियाँ अराजकता भरी थी और गुजरात को मुगल सम्राट अकबर ने 1573 में जीत लिया। मुगल शासनकाल के दौरान, अहमदाबाद व्यापार के साम्राज्य संपन्न केन्द्रों में से एक, विशेष रूप से वस्त्र उद्योग का केन्द्र बना, जहाँ से कपड़ा यूरोप तक के दूर देशों में निर्यात किया जाता था।
1630 में अकाल ने शहर को तबाह कर दिया। 1753 में मराठा जनरल रघुनाथ राव और दामजी गायकवाड़ की सेनाओं ने शहर पर कब्जा कर लिया और अहमदाबाद में मुगल शासन को समाप्त कर दिया। 1630 के अकाल ने तथा पेशवा और गायकवाड़ के शासन ने वस्तुतः शहर को नष्ट कर दिया।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1818 में शहर का पदभार संभाल लिया। एक सैन्य छावनी 1824 में स्थापित की गयी थी, 1858 में नगरपालिका सरकार और अहमदाबाद तथा बंबई (मुंबई) के बीच 1864 में रेलवे संपर्क स्थापित किया गया। अहमदाबाद का विकास व्यापार और वस्त्र निर्माण के एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में तेजी से हुआ। 

1915 में, महात्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका से आये और साबरमती के किनारे पर एक आश्रम की स्थापना की। उन्होंने 1930 में नमक सत्याग्रह शुरू किया। उन्होंने और उनके कई अनुयायियों ने अपने आश्रम से गुजरात के तटीय गाँव दांडी तक ब्रिटिशों ने नमक पर लगाये कर के विरोध में कूच की थी। उन्होंने आश्रम छोड़ने से पहले कसम खाई थी कि जब तक भारत स्वतंत्र नहीं होगा तब तक वे आश्रम नहीं लौटेंगे। 

1630 में अकाल ने शहर को तबाह कर दिया। 1753 में मराठा जनरल रघुनाथ राव और दामजी गायकवाड़ की सेनाओं ने शहर पर कब्जा कर लिया और अहमदाबाद में मुगल शासन को समाप्त कर दिया। 1630 के अकाल ने और पेशवा तथा गायकवाड़ के शासन ने वस्तुतः शहर को नष्ट कर दिया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1818 में शहर का पदभार संभाल लिया। एक सैन्य छावनी 1824 में स्थापित की गयी थी, 1858 में नगरपालिका सरकार और अहमदाबाद तथा बंबई (मुंबई) के बीच 1864 में रेलवे संपर्क स्थापित किया। अहमदाबाद का विकास व्यापार और वस्त्र निर्माण के एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में तेजी से हुआ है।
1915 में, महात्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका से आये और साबरमती के किनारे पर एक आश्रम की स्थापना की। उन्होंने 1930 में नमक सत्याग्रह शुरू किया। उन्होंने और उनके कई अनुयायियों ने अपने आश्रम से गुजरात के तटीय गाँव दांडी तक ब्रिटिशों द्वारा नमक पर लगाये कर के विरोध में कूच की थी। उन्होंने आश्रम छोड़ने से पहले कसम खाई थी कि जब तक भारत स्वतंत्र नहीं होगा तब तक वे आश्रम नहीं लौटेंगे।